निश्चित रूप से! घर पर फिटनेस की यात्रा शुरू करने के लिए बुनियादी नियमों का पालन करना आवश्यक है। चाहे आपका लक्ष्य वजन कम करना हो, मांसपेशियों का निर्माण करना हो या समग्र स्वास्थ्य में सुधार करना हो, कुछ बुनियादी सिद्धांत हैं जो आपकी सफलता की नींव रखेंगे। सही वार्म-अप से लेकर, उचित तकनीक बनाए रखने और अपने शरीर की बात सुनने तक, इन नियमों का पालन करके आप चोट से बच सकते हैं और अपने वर्कआउट से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।अब, व्यायाम करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप धीरे-धीरे शुरुआत करें, लेकिन नियमित रूप से व्यायाम करें। हमेशा सुनिश्चित करें कि आप अपने शरीर को सुनें और खुद को बहुत ज़्यादा न धकेलें।आइए, नीचे दिए गए लेख में हम इनके बारे में विस्तार से जानते हैं!
मेरी फिटनेस यात्रा की पहली सीढ़ी: सही शुरुआत कैसे करें?
लक्ष्य तय करना और योजना बनाना:
जब मैंने अपनी घर पर फिटनेस की यात्रा शुरू की थी, तो सबसे पहले यही सवाल मेरे मन में आया था कि आखिर मुझे करना क्या है? सिर्फ वजन कम करना है, या थोड़ी मांसपेशियां भी बनानी हैं?
यह सवाल जितना आसान लगता है, उतना ही ज़रूरी भी है, क्योंकि बिना किसी स्पष्ट लक्ष्य के आप भटक सकते हैं। जैसे मेरे साथ हुआ था, शुरुआत में मैंने बस ऐसे ही कुछ भी करना शुरू कर दिया था और कुछ हफ्तों बाद मुझे लगा कि मैं सही दिशा में नहीं जा रही हूँ। इसलिए, सबसे पहले अपने लक्ष्य तय करें – क्या आप ताकत बढ़ाना चाहते हैं, सहनशक्ति सुधारना चाहते हैं, या सिर्फ फिट रहना चाहते हैं?
एक बार जब आपका लक्ष्य तय हो जाए, तो एक छोटी सी योजना बनाएं। यह योजना आपकी दिनचर्या के हिसाब से होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, मैंने हर सुबह 30 मिनट का समय तय किया था और कैलेंडर पर इसे नोट किया था। इससे मुझे यह समझने में मदद मिली कि मुझे हर दिन क्या करना है और मैं अपने लक्ष्यों के प्रति कितनी गंभीर हूँ। यह एक ऐसा कदम है जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि यह सफलता की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
सही उपकरण का चुनाव: क्या सच में बहुत कुछ चाहिए?
कई लोग सोचते हैं कि घर पर एक्सरसाइज के लिए जिम जैसी महंगी चीज़ें चाहिए। पर मेरा अनुभव कहता है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है! शुरुआत में आपको शायद सिर्फ एक योगा मैट और कुछ डम्बल या पानी की बोतलें ही काफी होंगी। मुझे याद है जब मैंने पहली बार शुरू किया था, मेरे पास सिर्फ एक योगा मैट थी और मैंने अपनी पानी की बोतलों को डम्बल की तरह इस्तेमाल किया था। इसमें कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि आप कितने समर्पित हैं। धीरे-धीरे, जैसे-जैसे आपकी ज़रूरत बढ़ती जाए, आप कुछ रेसिस्टेंस बैंड या हल्के वज़न खरीद सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी ज़रूरतों और अपने बजट के अनुसार ही चुनाव करें। ज़रूरी नहीं है कि आप पहले दिन ही सब कुछ खरीद लें। पहले अपनी आदत बनाएं, और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ें। मैंने देखा है कि कई लोग महंगे उपकरण खरीद तो लेते हैं, पर कुछ दिनों बाद उन्हें इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं, इसलिए स्मार्ट तरीके से निवेश करें।
वर्कआउट से पहले की तैयारी: वॉर्म-अप क्यों ज़रूरी है?
शरीर को तैयार करना: चोट से बचने का मंत्र
आप में से कितने लोग सीधे बिस्तर से उठकर एक्सरसाइज करना शुरू कर देते हैं? सच कहूँ तो, मैंने भी यही गलती की थी! पर जल्द ही मुझे समझ आ गया कि ऐसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। वॉर्म-अप सिर्फ शरीर को गर्म करने से कहीं ज़्यादा है, यह आपके मांसपेशियों और जोड़ों को आने वाले वर्कआउट के लिए तैयार करता है। यह रक्त संचार बढ़ाता है और आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाता है, जिससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है। मुझे याद है एक बार मैंने बिना वॉर्म-अप के ही थोड़ी तेज़ एक्सरसाइज कर ली थी और अगले कुछ दिन मेरी गर्दन में दर्द रहा था। तब से, मैंने वॉर्म-अप को कभी हल्के में नहीं लिया। 5-10 मिनट का हल्का वॉर्म-अप जैसे कि जॉगिंग, आर्म सर्कल्स, लेग स्विंग्स, या जंपिंग जैक आपकी मांसपेशियों को सक्रिय कर सकता है। यह न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी आपको तैयार करता है, जिससे आप वर्कआउट पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
सही फॉर्म और तकनीक: गुणवत्ता, मात्रा से बेहतर है
जब आप घर पर एक्सरसाइज कर रहे होते हैं, तो कोई ट्रेनर आपके साथ नहीं होता जो आपको सही तरीका बताए। ऐसे में, यह और भी ज़रूरी हो जाता है कि आप हर एक्सरसाइज की सही तकनीक जानें। मैंने शुरुआत में कई वीडियो देखे और हर एक्सरसाइज को बहुत ध्यान से सीखा। गलत फॉर्म में एक्सरसाइज करने से न सिर्फ आपको वांछित परिणाम नहीं मिलते, बल्कि गंभीर चोट भी लग सकती है। मुझे खुद अनुभव हुआ है कि जब मैं स्क्वाट्स गलत तरीके से करती थी, तो मेरे घुटनों में दर्द होने लगता था। लेकिन जब मैंने सही तकनीक अपनाई, तो न केवल दर्द खत्म हुआ, बल्कि मेरी मांसपेशियों को भी सही तरीके से फायदा मिला। YouTube पर बहुत सारे विश्वसनीय फिटनेस चैनल हैं जो आपको हर एक्सरसाइज का सही तरीका बताते हैं। हमेशा याद रखें, कुछ कम रेप्स (repetitions) सही फॉर्म में करना, बहुत सारे रेप्स गलत फॉर्म में करने से कहीं ज़्यादा फायदेमंद होता है। अपनी गति धीमी रखें और हर हरकत पर ध्यान दें।
अपने शरीर की सुनो: यह तुमसे क्या कह रहा है?
आराम और रिकवरी: अनदेखी न करें
मैंने हमेशा यही सोचा था कि जितना ज़्यादा वर्कआउट करूंगी, उतने ही जल्दी परिणाम मिलेंगे। पर मेरा अनुभव कहता है कि यह बिलकुल गलत धारणा है! शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी देना उतना ही ज़रूरी है जितना कि खुद वर्कआउट करना। जब आप एक्सरसाइज करते हैं, तो आपकी मांसपेशियों में छोटे-छोटे टूट-फूट होते हैं, और आराम के समय ही वे खुद की मरम्मत करती हैं और मजबूत बनती हैं। पर्याप्त नींद लेना और अपने शरीर को आराम देना आपकी मांसपेशियों को ठीक होने का मौका देता है। मुझे याद है एक बार मैं लगातार कई दिनों तक वर्कआउट करती रही और फिर मुझे बहुत ज़्यादा थकान महसूस होने लगी और मेरा वर्कआउट करने का मन ही नहीं करता था। तभी मुझे समझ आया कि मैंने अपने शरीर को आराम का मौका नहीं दिया। अपने शेड्यूल में आराम के दिनों को ज़रूर शामिल करें। यह आपको बर्नआउट से बचाएगा और आपकी फिटनेस यात्रा को लंबा और स्थायी बनाएगा।
दर्द और बेचैनी में अंतर समझना:
वर्कआउट के दौरान थोड़ा-बहुत मांसपेशियों में खिंचाव या थकान महसूस होना सामान्य है, इसे ‘गुड पेन’ कहते हैं। लेकिन अगर आपको तेज़, तीखा या लगातार दर्द महसूस हो, तो इसे कभी नज़रअंदाज़ न करें। यह ‘बैड पेन’ हो सकता है जो किसी चोट का संकेत है। मैंने खुद देखा है कि कई लोग दर्द होने पर भी वर्कआउट करते रहते हैं, यह सोचकर कि यह उनकी सहनशक्ति का परीक्षण है। लेकिन यह बहुत बड़ी गलती है!
मेरा सुझाव है कि अगर आपको ऐसा दर्द हो, तो तुरंत रुक जाएं और अपने शरीर को आराम दें। अगर दर्द बना रहता है, तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने में कोई बुराई नहीं है। अपने शरीर के संकेतों को समझना और उनके अनुसार प्रतिक्रिया देना बहुत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ आपको चोट से नहीं बचाता, बल्कि आपको अपने शरीर के साथ एक गहरा संबंध बनाने में भी मदद करता है।
पोषण: आपकी मेहनत का असली ईंधन
सही आहार ही आपकी आधी जीत है:
हम कितनी भी मेहनत कर लें, अगर हमारा खान-पान सही नहीं है, तो हमें कभी भी मनचाहे परिणाम नहीं मिलेंगे। मैंने यह बात खुद अपनी आँखों से देखी है और अनुभव की है। जब मैंने अपनी फिटनेस यात्रा शुरू की, तो मैं एक्सरसाइज तो करती थी, पर खाने-पीने पर ज़्यादा ध्यान नहीं देती थी। नतीजा यह हुआ कि मुझे बहुत धीरे-धीरे बदलाव दिख रहे थे। लेकिन जब मैंने अपने आहार में बदलाव किए, प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा को शामिल किया और प्रसंस्कृत भोजन से दूरी बनाई, तो मुझे वाकई में बहुत बड़ा फर्क महसूस हुआ। आपका शरीर एक मशीन की तरह है, और इसे सही ईंधन की ज़रूरत होती है ताकि यह ठीक से काम कर सके। पौष्टिक भोजन आपको ऊर्जा देता है, मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करता है और आपके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। यह सिर्फ वजन कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि अंदर से स्वस्थ और मजबूत महसूस करने के बारे में है।
पानी की अहमियत:
क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर का एक बड़ा हिस्सा पानी से बना है? फिर भी हम अक्सर पानी पीने की अहमियत को भूल जाते हैं। मेरा मानना है कि पर्याप्त पानी पीना आपकी फिटनेस यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल आपके शरीर को हाइड्रेटेड रखता है, बल्कि यह आपके चयापचय (metabolism) को भी ठीक रखता है और वर्कआउट के दौरान आपको ऊर्जावान महसूस कराता है। मैंने खुद देखा है कि जब मैं पर्याप्त पानी नहीं पीती थी, तो वर्कआउट के दौरान मुझे जल्दी थकान महसूस होती थी और कभी-कभी सिरदर्द भी होता था। लेकिन जब मैंने दिन भर पानी पीने की आदत डाली, तो मेरी ऊर्जा का स्तर बढ़ गया और मेरी रिकवरी भी बेहतर हुई। हमेशा अपने पास एक पानी की बोतल रखें और दिन भर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। यह एक छोटी सी आदत है जो बड़े बदलाव ला सकती है।
नियमितता और धैर्य: ये ही सफलता की कुंजी हैं
एक दिन में रोम नहीं बना था:
हम सभी जल्दी परिणाम चाहते हैं, है ना? मुझे भी यही लगता था। जब मैंने शुरुआत की थी, तो मैं हर सुबह शीशे में देखती थी कि क्या कोई बदलाव आया? लेकिन सच्चाई यह है कि फिटनेस एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। इसमें समय और धैर्य दोनों लगते हैं। मेरा अनुभव कहता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप नियमित रहें। हर दिन थोड़ा-थोड़ा करें, भले ही वह सिर्फ 20 मिनट ही क्यों न हो, लेकिन लगातार करें। कुछ लोग शुरुआत में बहुत ज़्यादा जोश में आकर हर दिन घंटों वर्कआउट करते हैं और फिर कुछ हफ्तों में थक कर छोड़ देते हैं। मैंने भी यही गलती की थी और फिर मुझे लगा कि मैं कभी फिट नहीं हो सकती। लेकिन जब मैंने नियमितता पर ध्यान दिया – हर दिन थोड़ा, पर रोज़ – तो मुझे स्थायी बदलाव दिखने लगे। यह आपकी आदत बन जाती है और फिर आपको इसके बिना अधूरा सा महसूस होता है।
छोटी जीत का जश्न मनाना: प्रेरणा का स्रोत
जब हम बड़े लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो कभी-कभी रास्ते में छोटी-छोटी सफलताओं को भूल जाते हैं। मेरा मानना है कि अपनी फिटनेस यात्रा में छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाना बहुत ज़रूरी है। उदाहरण के लिए, मैंने जब पहली बार बिना रुके 10 पुश-अप्स किए थे, तो मुझे बहुत खुशी हुई थी। यह मुझे अगले लक्ष्य के लिए प्रेरित करता था। हो सकता है आपने आज एक नया आसन सीखा हो, या आपने अपने पानी पीने की आदत में सुधार किया हो, या आपने अपनी डाइट में कुछ स्वस्थ बदलाव किए हों। ये सभी छोटी-छोटी जीत हैं जो आपको यह महसूस कराती हैं कि आप सही रास्ते पर हैं और आगे बढ़ रहे हैं। यह आपको बोरियत और निराशा से बचाता है और आपकी प्रेरणा को बनाए रखता है। याद रखें, हर बड़ा सफर छोटे कदमों से ही शुरू होता है।
छोटी-छोटी बातों का ध्यान: बड़े बदलाव की नींव
सही समय का चुनाव:

क्या आप जानते हैं कि आपके वर्कआउट का समय भी आपकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? मैंने खुद देखा है कि जब मैं सुबह जल्दी वर्कआउट करती थी, तो मेरा पूरा दिन ज़्यादा ऊर्जावान रहता था और मैं ज़्यादा उत्पादक महसूस करती थी। लेकिन कुछ लोग शाम को वर्कआउट करना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें तब ज़्यादा ऊर्जा महसूस होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने लिए ऐसा समय चुनें जो आप हर दिन आसानी से निकाल सकें और जिसे आप एक आदत बना सकें। यह आपके काम के शेड्यूल, आपकी नींद और आपके परिवार की ज़रूरतों के अनुरूप होना चाहिए। मुझे याद है जब मैंने सुबह वर्कआउट करना शुरू किया था, तो पहले कुछ दिन मुझे बहुत मुश्किल हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह मेरी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग बन गया।
प्रगति को ट्रैक करना: अपनी कहानी खुद लिखें
जब आप अपनी फिटनेस यात्रा पर होते हैं, तो अपनी प्रगति को ट्रैक करना बहुत ज़रूरी है। यह आपको यह जानने में मदद करता है कि आप कहां से शुरू हुए थे और आप कितनी दूर आ गए हैं। मैंने खुद अपनी प्रगति को एक नोटबुक में नोट करना शुरू किया था – मैंने कितने रेप्स किए, कितने सेट किए, कितने मिनट तक एक्सरसाइज की। इससे मुझे यह देखने में मदद मिली कि मैं हर हफ्ते कैसे सुधार कर रही हूँ। कभी-कभी जब मेरा मन नहीं करता था, तो मैं अपनी पुरानी नोट्स देखती थी और मुझे लगता था कि मैंने इतनी मेहनत की है, मैं इसे छोड़ नहीं सकती। आप अपने वज़न, माप, या अपनी तस्वीरों को भी ट्रैक कर सकते हैं। यह आपको अपनी मेहनत के परिणाम देखने में मदद करता है और आपको प्रेरित रखता है। अपनी कहानी खुद लिखें और हर कदम पर अपनी प्रगति को देखें।
प्रेरणा बनाए रखना: बोरियत को कैसे दूर करें?
वर्कआउट को मज़ेदार बनाना:
क्या आपको लगता है कि वर्कआउट हमेशा बोरिंग होता है? सच कहूँ तो, शुरुआत में मुझे भी ऐसा ही लगता था! लेकिन धीरे-धीरे मैंने समझा कि वर्कआउट को मज़ेदार बनाना हमारे हाथ में है। मैंने अलग-अलग तरह के वर्कआउट ट्राई किए – कभी योगा, कभी डांस फिटनेस, कभी हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT)। मुझे याद है जब मैं एक ही तरह की एक्सरसाइज करते-करते ऊब गई थी, तो मैंने ऑनलाइन नए वर्कआउट वीडियो देखने शुरू किए और मुझे कई नए और रोमांचक तरीके मिले। अपनी प्लेलिस्ट में अपने पसंदीदा गाने जोड़ें जो आपको ऊर्जा दें। आप अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों के साथ वर्कआउट करने की कोशिश भी कर सकते हैं, इससे माहौल थोड़ा हल्का हो जाता है। मेरा अनुभव कहता है कि जब आप वर्कआउट को एक खेल की तरह देखते हैं, तो यह बोझ नहीं लगता, बल्कि एक सुखद अनुभव बन जाता है।
हार मत मानना: यह एक यात्रा है, मंज़िल नहीं
आपकी फिटनेस यात्रा में ऐसे दिन भी आएंगे जब आपका मन नहीं करेगा, जब आप थक जाएंगे, या जब आपको लगेगा कि कोई प्रगति नहीं हो रही है। यह बिलकुल सामान्य है! मुझे याद है ऐसे कई दिन थे जब मुझे बिस्तर से उठने का मन नहीं करता था। लेकिन यही वह समय होता है जब आपको खुद को याद दिलाना होता है कि आपने यह सब क्यों शुरू किया था। मैंने खुद को हमेशा यह बताया है कि एक बुरा दिन आपकी पूरी यात्रा को खराब नहीं करता। एक ब्रेक लें, खुद को आराम दें और अगले दिन नए सिरे से शुरुआत करें। अपनी गलतियों से सीखें, लेकिन उन पर अटके न रहें। यह एक यात्रा है जो उतार-चढ़ाव से भरी होगी, लेकिन हर कदम पर आप कुछ नया सीखेंगे और मजबूत बनेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप हार न मानें।
| वर्कआउट का लक्ष्य | मुख्य व्यायाम (घर पर) | सुझावित आवृत्ति |
|---|---|---|
| वजन कम करना | जंपिंग जैक, बर्पीज़, हाई नीज़, माउंटेन क्लाइंबर्स | हफ्ते में 4-5 बार, 30-45 मिनट |
| मांसपेशियों का निर्माण | पुश-अप्स, स्क्वाट्स, लंजिस, प्लैंक, डम्बल रो (पानी की बोतल से) | हफ्ते में 3-4 बार, 40-60 मिनट |
| सहनशक्ति बढ़ाना | जॉगिंग (जगह पर), रोप जंपिंग (बिना रस्सी), डांस वर्कआउट | हफ्ते में 5-6 बार, 20-30 मिनट |
| लचीलापन सुधारना | योगा, स्ट्रेचिंग, पिलाटेस | हर दिन या हर वैकल्पिक दिन, 15-30 मिनट |
निष्कर्ष
तो दोस्तों, यह थी मेरी घर पर फिटनेस यात्रा की कहानी। मुझे उम्मीद है कि इससे आपको प्रेरणा मिलेगी और आप भी अपनी फिटनेस यात्रा शुरू करने के लिए उत्साहित होंगे। याद रखें, यह एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। इसमें समय, धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप इसे एन्जॉय करें और हर कदम पर खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें।
जानने योग्य उपयोगी जानकारी
1.
अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें: फिटनेस यात्रा शुरू करने से पहले, अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। क्या आप वजन कम करना चाहते हैं, मांसपेशियों का निर्माण करना चाहते हैं, या सिर्फ स्वस्थ रहना चाहते हैं? स्पष्ट लक्ष्य आपको प्रेरित रहने और ट्रैक पर बने रहने में मदद करेंगे।
2.
यथार्थवादी उम्मीदें रखें: फिटनेस में समय लगता है, इसलिए त्वरित परिणामों की अपेक्षा न करें। प्रगति देखने में समय लग सकता है, इसलिए धैर्य रखें और लगातार प्रयास करते रहें।
3.
सही वर्कआउट चुनें: ऐसे वर्कआउट चुनें जो आपको पसंद हों और जो आपकी जीवनशैली के अनुकूल हों। यदि आप वर्कआउट का आनंद नहीं लेते हैं, तो आप उनसे चिपके रहने की संभावना कम है।
4.
धीरे-धीरे शुरू करें: यदि आप व्यायाम करने के लिए नए हैं, तो धीरे-धीरे शुरू करें और धीरे-धीरे तीव्रता और अवधि बढ़ाएं। बहुत जल्दी बहुत अधिक करने से चोट लग सकती है।
5.
अपने शरीर को सुनें: यदि आपको दर्द हो रहा है, तो रुकें और आराम करें। अपने शरीर को सुनना और उसके संकेतों का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण बातें
* अपने फिटनेस लक्ष्यों को निर्धारित करें और एक योजना बनाएं
* धीरे-धीरे शुरुआत करें और लगातार बने रहें
* वार्म-अप और कूल-डाउन को कभी न छोड़ें
* सही फॉर्म का प्रयोग करें ताकि आप व्यायाम से सबसे अधिक लाभ उठा सकें और चोट से बच सकें
* पर्याप्त आराम करें और अपने शरीर को ठीक होने दें
* पौष्टिक आहार का सेवन करें जो आपके शरीर को ईंधन देगा
* हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त पानी पिएं
* अपनी प्रगति को ट्रैक करें और अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाएं
* प्रेरित रहने के लिए वर्कआउट को मज़ेदार बनाएं
* हार न मानें, यह एक यात्रा है, मंज़िल नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: घर पर कसरत शुरू करने के लिए मुझे किन चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी?
उ: अरे वाह, ये तो बहुत अच्छा सवाल है! मैंने अपने फिटनेस के सफ़र में एक बात सीखी है कि घर पर कसरत शुरू करने के लिए आपको बहुत ज़्यादा चीज़ों की ज़रूरत नहीं होती। सच कहूँ तो, आप बिना किसी उपकरण के भी कमाल कर सकते हैं!
मुझे याद है जब मैंने पहली बार शुरुआत की थी, तब मेरे पास बस एक योगा मैट और आरामदायक कपड़े थे। आज भी मेरा मानना है कि आपकी इच्छाशक्ति और थोड़ा सा खुला एरिया सबसे ज़रूरी है。अगर आप कुछ ख़ास खरीदना चाहते हैं, तो एक अच्छी योगा मैट या एक्सरसाइज़ मैट, और आरामदायक जूते काफी हैं। आप अपने वज़न का इस्तेमाल करके बहुत सारी एक्सरसाइज़ कर सकते हैं, जैसे पुश-अप्स, स्क्वैट्स, प्लैंक। बाद में, जैसे-जैसे आपकी शक्ति बढ़ती है, आप रेजिस्टेंस बैंड्स या हल्के डंबल जैसी चीज़ें जोड़ सकते हैं। पर यकीन मानिए, शुरुआत करने के लिए ये सब अनिवार्य नहीं है। सबसे पहले, बस अपने शरीर को चलाने की आदत डालिए!
प्र: घर पर व्यायाम करते समय खुद को प्रेरित कैसे रखूं?
उ: देखो दोस्तों, ये प्रेरणा वाली चीज़ न, बड़ी मज़ेदार है! कभी आती है, कभी गायब हो जाती है। मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि खुद को प्रेरित रखने के लिए कुछ छोटी-छोटी ट्रिक्स बहुत काम आती हैं। सबसे पहले, छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करो। जैसे, “आज मैं बस 15 मिनट चलूँगा” या “आज मैं सिर्फ 10 स्क्वैट्स करूँगा”। जब आप इन छोटे लक्ष्यों को पूरा करते हैं, तो आपको एक अंदरूनी खुशी मिलती है, जो आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।दूसरा, अपने वर्कआउट को मजेदार बनाओ!
अपनी पसंदीदा संगीत लगाओ, कोई पॉडकास्ट सुनो, या अपनी कोई फ़ेवरेट सीरीज़ देखते हुए हल्की एक्सरसाइज़ करो। अगर संभव हो, तो परिवार के किसी सदस्य को अपना वर्कआउट पार्टनर बना लो। साथ में एक्सरसाइज़ करने से आलस कम आता है और मन भी लगा रहता है। अपनी प्रगति पर नज़र रखना भी बहुत ज़रूरी है। जब आप देखते हैं कि आप पहले से बेहतर कर रहे हैं, तो यह आपको और भी जोश देता है। याद रखना, यह एक सफ़र है, और इसमें उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। बस हार मत मानना!
प्र: चोट से बचने और सही तरीका बनाए रखने के लिए क्या करें?
उ: दोस्तों, चोट से बचना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि एक बार चोट लग जाए तो पूरा रूटीन बिगड़ जाता है। मुझे भी पहले इस बात का डर लगता था, इसलिए मैंने हमेशा कुछ बातों का ध्यान रखा। सबसे पहले, कोई भी एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले वार्म-अप करना बहुत ज़रूरी है। 5-10 मिनट तक हल्के स्ट्रेचिंग या जॉगिंग करने से शरीर एक्सरसाइज़ के लिए तैयार हो जाता है और मांसपेशियों में लचीलापन आता है। और हाँ, एक्सरसाइज़ ख़त्म करने के बाद कूल-डाउन और स्ट्रेचिंग करना भी उतना ही अहम है, इससे दर्द कम होता है।दूसरी बात, हमेशा सही तकनीक या फॉर्म पर ध्यान दो। जल्दबाजी में ज़्यादा रेप्स करने के बजाय, कम रेप्स करो पर सही तरीके से करो। आजकल ऑनलाइन बहुत सारे वीडियोज़ मिल जाते हैं, जिन्हें देखकर आप सीख सकते हैं कि कौन सी एक्सरसाइज़ कैसे करनी है। अगर किसी एक्सरसाइज़ में दर्द महसूस हो, तो तुरंत रुक जाओ। अपने शरीर की सुनो। यह आपको खुद बताएगा कि कब रुकना है और कब आगे बढ़ना है। अपनी क्षमता से ज़्यादा ज़ोर मत डालो, खासकर शुरुआत में। धीरे-धीरे प्रगति करो, क्योंकि फिटनेस एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं!






